Saturday, September 24, 2011

उठान डगर


उठान डगर 

  मेरे घर के पास स्थित हनुमान मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ वर्ष पूर्व चित्रकारी की गई थी। उन चित्रों में से कुछ को मैंने अपने कैमरे में कैद कर लिया। पांच-छह साल बाद वहां अब केवल काई लगी दीवार है, झाड़-झंखाड़ है। उन्हीं छायाचित्रों में से एक है यह छायाचित्र जिसमें मानव के विकास, उपर उठने की जिजिविषा दर्शाई गई है कि किस तरह मानव अपने मूल स्थिति से खुद  को उपर विकासक्रम में स्थापित करने हेतु सीढ़ी लाता है, और उपर उठना चाहता है कि तभी उसकी राह रोकने के लिये विषधर भी आ जाते हैं।

- सतीश पंचम 

Saturday, September 17, 2011

भोज्य तक पहुंचने की जद्दोजहद

धर्म, रोजगार, पूंजीवाद,  बहस मुबाहिसों  से घिरे  भोजन  तक पहुंचने की कवायद 
    
  मुंबई के कालाघोड़ा में प्रदर्शित एक कलाकृति....

 - सतीश पंचम

Monday, August 8, 2011

नॉस्टॉल्जिया Rocks......











मुंबई के काला घोड़ा फेस्टिवल के दौरान बासु चटर्जी की फिल्में दिखाई जा रही थीं। ऑफिस टाइम होने के कारण मैं इस फिल्म फेस्टिवल में शामिल तो न हो पाया लेकिन बाहर लगे चित्रों से पता चल जाता है कि कितना नॉस्टॉल्जिक माहौल रहा होगा.......

   - सतीश पंचम

Sunday, August 7, 2011

मौसमी ठहराव



            बारिश में सिंके  भुट्टों का आनंद लेना अच्छा लगता है लेकिन यही बरसात गाँव की कच्ची सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों के लिये मुश्किल खड़ी कर देती है, उन्हें जब तब कीच-काच में फंसा देती है। दूसरी ओर लगन का Season भी बारिश में नहीं होता जिससे कि शादी ब्याह के मौसम में किराये पर दी जाने वाली कारें जिनमें बैठ  दुल्हा दुल्हन लाये ले जाये जाते हैं वह भी नहीं हो पाता।

    नतीजतन वैवाहिक प्रयोजन और ऐसे तमाम कार्यों  के लिये इस्तेमाल में लाई जा रही गाड़ियां बरसात भर खड़ी कर दी जाती हैं.....मौसमी ठहराव के लिये।

ऐसी ही एक सुबह गाँव में घूमते समय एक घर से ली गई तस्वीर।

- सतीश पंचम

Thursday, August 4, 2011

रास्ते पर यूँ भी कभी......

         आज सुबह ऑफिस जाते समय देखा दो बच्चे एक थाली में सांप की तरह का कुछ लिये हैं और रास्ते में एक महिला उनकी थाली में सिक्का डाल हाथ जोड़ रही है। देखते ही तुरंत जेहन में आया - ओह,  आज तो नागपंचमी है।
  हमारे पर्व त्योहार कभी कभी दूसरों के जरिये भी याद आ आते हैं :)







Friday, July 22, 2011

एक 'खटास' ऐसी भी


भीषण गर्मी (April - 2011)  के दौरान मेरे आम के पेड़ पर छंहाते ( ? ) कबूतर !


लगता है दोनों कबूतरों के बीच 'खटास' आ गई है .......

कम से कम उपर लटकते आम तो उसी ओर इशारा कर रहे हैं :)

- सतीश पंचम

Sunday, July 17, 2011

देशज क्लिक

'देशज क्लिक'

                                                              

Saturday, July 16, 2011

Wednesday, July 13, 2011

दिल्ली में मन्त्री घुरहू बनें कि कतवारू.......क्या फर्क पड़ता है :)


दिल्ली में मंत्रिमण्डल में जबरजस्त बदल हुआ है

तो क्या आज मेरी भैंस अच्छा दूध देगी ?
    समझ नहीं आता कि कैबिनेट रिशफ्फल जैसी खबर को मीडिया इतना ज्यादा क्यों तवज्जो देता है। एक आम आदमी को इससे क्या फर्क पड़ने वाला है कि कौन क्या बना, उसके लिये तो जैसे कल का दिन वैसे ही आज का।


Sunday, July 10, 2011

Monday, June 27, 2011

आग-आंच

Photo : Satish Pancham

Note -  मेरे पुराने स्टॉक की एक देशज तस्वीर, इन तस्वीरों में कबीर, रहीम आदि के विचारों को सुसज्जित करके मैंने अपने पोर्टल पर पांच-छह साल पहले  पेश किया था।

पेश है उसी चित्र-शृंखला.....  'सुजान बटोही' का पुराना चित्र।


Tuesday, June 14, 2011

मुंबईया मानसून......





























मुंबई के फुटपाथ पर जमी गृहस्थी, घिरते बादल और झमाझम........

Wednesday, June 8, 2011

ये बेफिक्री का आलम.......

       करीब पांच-छह साल पहले खेंची गई यह तस्वीर तब की है जब मध्य प्रदेश के किसी स्टेशन से गुजर रहा था। उस स्टेशन का नाम तो याद नहीं लेकिन ट्रेन कुछ मिनटों के लिये उस स्टेशन पर रूकी थी, कि तभी इन 'दो सज्जनों' पर नज़र पड़ी जो अपने दोनों बोरे पीछे प्लेटफार्म पर रख  बड़ी ही  बेफिक्री से  नीचे पटरी की ओर पैर लटकाये प्लेटफार्म पर बतिया रहे थे।

   इनकी बेफिक्री देख, इनके फुरसत वाले क्षणों को देख थोड़ा सा कौतुहल हुआ। संभवत:  इनके कम्पेरिज़न में ही मुंबई की भागदौड़  के बारे में कहा गया होगा - यहाँ तो 'मरने तक की' फुरसत नहीं है।

 और इन्हें देखो.......फुरसत ही फुरसत  :)

 - सतीश पंचम 

Saturday, June 4, 2011

'हसरती बैनर' और 'शुभ-फ़हमी'

India Against Corruption?

Huh.....

Who Cares ?

First,  Take a  शुभकामना मेरे दोस्त :)

       अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के वक्त जगह जगह ढेर सारे बैनर बड़ी हसरतों से लगाये गये थे.....India Against Corruption, Second Freedom struggle, India Awakened....bla bla bla.
 दिन बीते और उन बैनरों पर फिर से लद गये वही पुराने कोफ्त बढ़ाते हार्दिक शुभकामना वाले संदेसे।

      बाबा रामदेव को लेकर दिग्विजय सिंह ऐसे ही हवा में नहीं बोल रहे हैं फूँ...फाँ.... उस शख्स को पता है कि चाहे बाबा रामदेव हों या अन्ना हजारे...... दो चार महीनों   में ही  सभी की परिणति इस India Against corruption वाले  'हसरती बैनर' सरीखी होनी है..... नेता  जमात पहले की तरह ही पुराने वाले बैनरों के उपर ही अपने को स्थापित करेंगे...... 'हार्दिक शुभ-कामनाएँ' निर्बाध रूप से बांटते रहेंगे और जनता ऐंवे ही करप्शन मिटने की 'शुभ-फ़हमी' पाले रहेगी।

 - सतीश पंचम

Saturday, May 28, 2011

जलज 'ठाँव'

रहिमन निज संपत्ति बिना, कोउ न बिपति सहाय ।
बिनु पानी ज्यों जलज को,  नहिं रवि सकै बचाय ।।
    रहीम कहते हैं कि   जब कोई विपत्ति आन पड़े तो निजी संपत्ति  ही सहायक होती है,  बाहरी सहायता की  उम्मीद करना ठीक नहीं। हो सके तो समय के साथ थोड़ा-थोड़ा धन संचय करते रहना चाहिए, वही विपत काल में काम देता है। क्योंकि देखा गया है कि जब पास में कुछ न हो तो जो सहायता करने की नीयत वाले होते हैं वो भी हाथ खड़े कर देते हैं। 

     कमल अपने पास स्थित जल से सिंचित होकर खिलता है तो सूर्य उसे विकसित करता है, बड़ा करता है। किंतु,  यदि पानी ही सूख जाय तो सूर्य सहायता करना भी चाहे तो भी कमल की सहायता नहीं कर पाता।

Image detail  : तालाब में खिलने को तैयार जलज,  मुंबई के भायखला इलाके में स्थित एक चिड़ियाघर के हैं।

Tuesday, May 24, 2011

लहबर

'लहबर' उठाये हुए मुस्लिम फ़कीर

    अक्सर किसी-किसी इलाके के मान्य किसी फकीर अथवा साईं के दरगाह, मजार हेतु तीर्थयात्रा के लिये  जाते समय कुछ भक्त गण इलाके की प्रथानुसार हर घर से थोड़ा थोड़ा अन्न-दान लेते चले जाते हैं, कुछ लोग साथ साथ जाते हैं दान में मिली अन्न की बोरियों को ढोने-पहुंचाने के लिये .... साथ ही साथ जाता है रंग बिरंगे कपड़ों में लिपटा 'लहबर' ।

Saturday, May 21, 2011

The प्रथम वंदनाइजेशन

अपनी पारी का इंतजार करते बैकग्राउण्ड में गणेश जी

    अक्सर किसी भी काम के शुरूवात में गणेश जी को शामिल किया जाता है, लेकिन जब बात महीने की शुरूवात में मिलने वाली सैलेरी की हो तो गणेश जी को साइड करते हुए  सबसे पहले पति-पत्नी ही आपस में गुणा भाग में जुट लेते हैं - दूधवाले का बिल, बिजली का बिल, पानी का बिल, फ्लैट का मेंटेनेंस...... और इस गुणा भाग में हमेशा प्रथम वंदित होने वाले गणेश जी, सेकंड वंदिते के रूप में  इंतजार करते नज़र आते हैं......प्रथम वंदन तब सैलेरी देवता हो जाते है शायद  :)

 - सतीश पंचम

Tuesday, May 17, 2011

'द्रौपदी'

'द्रौपदी'

'गाँव-घर' में हो रहे एक निर्माण कार्य के दौरान बालू में  मिले कुछ पत्थर और घर के पास ही स्थित गुलाब के पौधे से मिली - द्रौपदी...... जिसे कि  दुपहरी में बैठे-ठाले अपने कैमरे में कैद कर लिया :)

     Update -  दरअसल इस 'गुलाब और पत्थर' छायाचित्र को देखते ही मुझे वह महाभारत का प्रसंग याद आ गया जिसमें कि एक ओर जुए के दौरान हारी हुई, अपमानित द्रौपदी है और दूजी ओर उसके पांचो पति राजसभा में मौजूद हैं। उनके पास द्रौपदी के अपमानित होते देखते रहने के सिवा कोई चारा नहीं, यानि कि जड़-पत्थर की मानिंद पांचो बैठे रहे।

 - सतीश पंचम

Sunday, May 15, 2011

The 'डन्ठल'



थोड़ी सी गर्मी
थोड़ी सी पुरवाई
थोड़े से गेहूँ के डंठल

और

ख़ामोश दुपहरी

Tuesday, May 10, 2011

Hey Sibal.......


छोटा बच्चा जान के हमको ना...... 

Once upon a Time :)

Kapil Sibal had announced an Indian touchscreen tablet computer, which will be available to students for 1500 INR under One Laptop per Child (OLPC) Plan.

 सभी बच्चों को समय से किताब कापी मिल जाय वही बहुत है..... ऐसे में  One Laptop Per Child Plan.... ???

मजाक अच्छा कर लेते हैं मनिस्टर लोग :)